- बदरीनाथ में संस्कृति और सेना का संगम, ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल’ का भव्य समापन।
बदरीनाथ धाम के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में आयोजित महोत्सव की थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ रखी गई। मुख्यमंत्री धामी ने इससे पहले बामणी गांव पहुंचकर नंदा अष्टमी के अवसर पर आयोजित उत्सव में ग्रामीणों के साथ प्रतिभाग किया। उन्होंने ग्रामीणों को नंदा अष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया।
महोत्सव परिसर में स्थानीय उत्पादों, महिला स्वयं सहायता समूहों, हस्तशिल्प और पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई। मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का अवलोकन कर स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़ने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बाजार और पर्यटन से जोड़ने से सीमांत क्षेत्रों में आजीविका और स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
कार्यक्रम में भारतीय सेना की ओर से सैन्य प्रदर्शनी भी लगाई गई। मुख्यमंत्री ने अत्याधुनिक हथियारों और सैन्य उपकरणों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियां युवाओं को सेना की कार्यप्रणाली से परिचित कराने और उनमें राष्ट्र सेवा की भावना मजबूत करने का माध्यम हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की आत्मा उसकी लोक संस्कृति में बसती है। लोक गीत, लोक नृत्य, परंपराएं और रीति-रिवाज हमारी पहचान हैं। नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र के साथ संस्कृति और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने सीमांत क्षेत्रों में सड़क, बिजली, दूरसंचार, पर्यटन और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने बताया कि मिलेट मिशन, एप्पल मिशन, होम स्टे, कृषि, बागवानी, पशुपालन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। शीतकालीन और साहसिक पर्यटन के साथ ‘वेडिंग इन उत्तराखण्ड’ जैसी पहलों पर भी जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सेना और स्थानीय नागरिकों के बीच सहयोग एवं समन्वय को मजबूत करने में ऐसे आयोजनों की अहम भूमिका है। उन्होंने माणा गांव के ग्रामीणों की पारंपरिक प्रस्तुति की सराहना की और महोत्सव के सफल आयोजन के लिए भारतीय सेना, जिला प्रशासन चमोली और सभी आयोजकों को बधाई दी।
बदरीनाथ धाम की पावन भूमि पर आयोजित देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति, स्थानीय उत्पादों और सैन्य विरासत को एक मंच पर लाने का काम किया। महोत्सव के जरिए ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ का संदेश भी दिया गया।

