sonbahis girişsonbahissonbahis günceljojobetholiganbetjojobet girişcasibom girişholiganbet girişvaycasinoholiganbetpusulabet girişholiganbet girişbettilt girişpusulabetbettiltbettilt girişgrandpashabetromabetroyalbetcratosroyalbetgrandpashabetcasibom girişbettiltエクスネスcasibombettilt girişbettiltbettilt girişbettiltjojobet girişatlasbet girişsüratbetsüratbet girişaresbetaresbet girişmeritkingmeritking girişmavibetmavibet girişhızlıcasinohızlıcasino giriştrendbettrendbet girişbahiscasinobahiscasino girişwinxbetwinxbet girişkulisbetibizabetibizabet girişextrabetextrabet girişkingbettingkingbetting girişbetciobetcio girişpusulabetpusulabet girişnakitbahisnakitbahis girişhilbet girişhiltonbet girişhiltonbetlunabetlunabet girişmatbetmatbet girişjojobetjojobetjojobetjojobetJojobet girişjojobetPusulabetpusulabetcasibom güncel girişlunabet girişcoinbarcoinbar girişartemisbetartemisbet girişodeonbetodeonbet girişzirvebetzirvebet girişnakitbahisnakitbahis girişmatbetmatbet girişmavibetmavibet girişkavbetkavbet girişpusulabetibizabetibizabet girişbetciobetcio girişextrabetextrabet girişkingbettingkingbetting girişbetsmovebetsmove girişvaycasinovaycasino girişmarsbahismarsbahis girişkingroyalekingroyale girişholiganbetholiganbet girişelitcasinoelitcasino girişlunabetlunabet girişcoinbarcoinbar girişartemisbetartemisbet girişodeonbetodeonbet girişzirvebetzirvebet girişnakitbahisnakitbahis girişmatbetmatbet girişmavibetmavibet girişkavbetkavbet girişpusulabetpusulabet girişbetsmovebetsmove girişvaycasinovaycasino girişmarsbahismarsbahis girişkingroyalkingroyal girişholiganbetholiganbet girişelitcasinoelitcasino girişibizabetibizabet girişbetciobetcio girişkingbettingkingbetting girişextrabetextrabet girişbetyapbetyap girişcasivalcasival girişcasiveracasivera girişceltabetceltabet girişenbetenbet girişenobahisenobahis girişgalabetgalabet girişgobahisgobahis girişgolbetgolbet girişcasinoroyalcasinoroyal girişlunabetlunabet girişartemisbetartemisbet girişhızlıcasinohızlıcasino girişmavibetmavibet girişnakitbahisnakitbahis girişmarsbahismarsbahis girişbetasusbetasus girişmegabahismegabahis girişkingbettingkingbetting girişibizabetibizabet girişbetistbetist girişenbetenbet girişenobahisenobahis girişgalabetgalabet girişgobahisgobahis girişgolbetgolbet girişbetyapbetyap girişcasinoroyalcasinoroyal girişcasivalcasival girişcasiveracasivera girişceltabetceltabet girişartemisbetartemisbet girişmavibetmavibet girişhızlıcasinohızlıcasino girişnakitbahisnakitbahis girişlunabetlunabet girişmarsbahismarsbahis girişbetasusbetasus girişkingbettingkingbetting girişibizabetibizabet girişmegabahismegabahis girişgobahisgobahisgolbetgolbet girişbetyapbetyap girişgalabetgalabet girişcasiveracasivera girişceltabetceltabet girişcasinoroyalcasinoroyal girişcasivalcasival girişenbetenbet girişenobahisenobahis girişbetyapbetyap girişbetyapbetyap girişbetvaktibetvakti girişkulisbetkulisbet girişkralbetkralbet girişhilbethilbet girişhiltonbethiltonbet girişgobahisgobahis girişgalabetgalabet girişenobahisenobahis girişenbetenbet girişceltabetceltabet girişcasiveracasivera girişcasivalcasival girişcasinoroyalcasinoroyal girişbovbetbovbet girişwinxbetwinxbetultrabetultrabetwipbetwipbetibizabetibizabetpumabetpumabetrinabetrinabetqueenbetqueenbetromabetromabetsmartbahissmartbahissonbahissonbahissohobetsohobetsüratbetmakrobet girişsüratbetteosbetmakrobetteosbettrendbettrendbetmakrobetmedusabahis girişmedusabahismedusabahisloyalbahis giirşloyalbahisloyalbahisnesinecasino girişnesinecasinonesinecasinomilosbet girişmilosbetmilosbetorisbet girişorisbetorisbet

पद्मश्री अनिल जोशी सहित अन्य को 2011 में दिए पट्टे रद्द करने की मांग, साल के जंगल व वन भूमि पर हुए अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे एडवोकेट विकेश नेगी

  • RTI एक्टिविस्ट विकेश नेगी का बड़ा खुलासा: ‘पर्यावरण संरक्षण’ की आड़ में साल के जंगल पर कब्जा, पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी सहित अन्य को 2011 में दिए गये पट्टे रद्द करने की मांग
  • 94.9060 है0 { लगभग 1138.872 वीघा } जमीन को एसडीएम विकासनगर व राज्य सरकार द्वारा गलत तरीके से पट्टों का आवंटन किया गया – विकेश नेगी
  • मुख्य सचिव, राजस्व सचिव और डीएम देहरादून से एडवोकेट विकेश सिंह नेगी ने की शिकायत

देहरादून: उत्तराखंड में वन भूमि और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। RTI एक्टिविस्ट और अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने इस बार जो खुलासा किया है, उसने न सिर्फ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर किए गये कथित दुरुपयोग को भी बेनकाब कर दिया है। इस बार खुलासे के केंद्र में हैं पद्मश्री और पद्मभूषण सम्मान से अलंकृत डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, जिनके नाम पर वर्ष 2011 में देहरादून के इस्ट होप टाउन क्षेत्र स्थित “साल जंगल” (वन भूमि) का आवंटन किए जाने का आरोप है। इस भूमि पर वर्तमान में HESCO NGO का भवन निर्मित है, जिसे अधिवक्ता नेगी ने अवैध बताते हुए इसे संवैधानिक, वैधानिक और न्यायिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन करार दिया है।

मुख्य सचिव से जिलाधिकारी तक भेजा गया विस्तृत प्रतिवेदन

एडवोकेट विकेश सिंह नेगी ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्य सचिव उत्तराखण्ड शासन, राजस्व सचिव और जिलाधिकारी देहरादून को एक विस्तृत और कानूनी तथ्यों से युक्त प्रतिवेदन भेजा है। प्रतिवेदन में खाता संख्या 02493, खसरा संख्या 384/1, कुल क्षेत्रफल 0.1170 हेक्टेयर, तथा राजस्व प्रविष्टि “साल जंगल / वन भूमि” दर्ज भूमि के वर्ष 2011 में किए गए आवंटन को पूर्णतः अवैध बताया गया है।प्रतिवेदन में मांग की गई है कि उक्त पट्टा/आवंटन को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए, अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जाए और इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय, दंडात्मक और आपराधिक कार्यवाही की जाए।

साल के जंगल को NGO भवन में बदलने का गंभीर आरोप

प्रतिवेदन के अनुसार जिस भूमि को सरकारी रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से “साल जंगल/वन भूमि” के रूप में दर्ज किया गया है, उसी भूमि पर वर्तमान में HESCO NGO का पक्का भवन खड़ा है। आरोप है कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर वन भूमि का उपयोग गैर-वन उद्देश्य के लिए किया गया। यह मामला केवल एक निर्माण या आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग, प्रशासनिक मिलीभगत और कानून की अनदेखी का प्रतीक बताया गया है।

1946 के बाद वन भूमि पर पट्टा अवैध: सुप्रीम कोर्ट

RTI एक्टिविस्ट नेगी ने अपने प्रतिवेदन में माननीय सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के उन फैसलों का उल्लेख किया है, जिनमें स्पष्ट किया गया है कि 8 अगस्त 1946 के बाद सरकार को भी वन भूमि पर पट्टा देने का कोई अधिकार नहीं है। इस तिथि के बाद जंगल, वन, झाड़ी, नदी, नाला, खत्तिहान जैसी श्रेणी की भूमि पर दिया गया प्रत्येक पट्टा Void ab initio (प्रारंभ से ही शून्य) माना जाता है। इस आधार पर वर्ष 2011 में किया गया आवंटन कानूनी रूप से अस्तित्वहीन बताया गया है।

UPZA & LR Act की धारा 132 का सीधा उल्लंघन

प्रतिवेदन में उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 132 का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। इस धारा के तहत जंगल, वन, वृक्ष वन, झाड़ी, नदी, नाला, तालाब, चारागाह जैसी भूमि पर न तो पट्टा दिया जा सकता है और न ही उसका निजीकरण किया जा सकता है। कानून के अनुसार ऐसी भूमि सदैव राज्य या वन विभाग में निहित रहती है। ऐसे में डॉ. अनिल प्रकाश जोशी को किया गया आवंटन सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन और असंवैधानिक बताया गया है।

वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत केंद्र की अनुमति जरूरी

वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा 2 के अनुसार किसी भी वन भूमि का गैर-वन उपयोग केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता। प्रतिवेदन में कहा गया है कि भूमि उपयोग परिवर्तन, भवन निर्माण और NGO संचालन के लिए किसी भी प्रकार की केंद्रीय स्वीकृति का कोई दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इस आधार पर पूरे निर्माण को अवैध घोषित किए जाने की मांग की गई है।

गोदावर्मन केस और 2025 का सुप्रीम कोर्ट आदेश

माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक टी.एन. गोदावर्मन बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए कहा गया है कि राजस्व रिकॉर्ड में यदि भूमि “जंगल”, “वन”, “झाड़ी या “साल जंगल” दर्ज है, तो वह स्वतः वन मानी जाएगी। इसके साथ ही 15 मई 2025 को पारित सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लेख है, जिसमें राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया था कि वन भूमि, जंगल-झाड़ी, नदी-नाले और राजस्व वन को तत्काल वन विभाग को हस्तांतरित किया जाए और किसी भी प्रकार का पट्टा या लीज अवैध माना जाएगा।

1952–54 की गजट अधिसूचनाएं भी बनीं आधार

प्रतिवेदन में उत्तर प्रदेश सरकार की 1952, 1953 और 1954 की गजट अधिसूचनाओं का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें वन भूमि और राजस्व वन का स्पष्ट सीमांकन किया गया था। इसके बावजूद वर्षों बाद ऐसी भूमि का आवंटन किया जाना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है।

पर्यावरणविद् के नाम पर जंगल कटान पर सवाल

इस पूरे मामले का सबसे विरोधाभासी पहलू यह बताया गया है कि जिस व्यक्ति को राष्ट्रीय स्तर पर “पर्यावरणविद्” के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, उसी के नाम पर साल जंगल काटकर भवन खड़ा किया गया। इसे पर्यावरण संरक्षण की आड़ में न्यायिक आदेशों की अवहेलना का गंभीर उदाहरण बताया गया है।

तीन बड़ी मांगें, प्रशासन पर दबाव

RTI एक्टिविस्ट व अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने प्रशासन से तीन स्पष्ट मांगें रखी हैं—
वर्ष 2011 में दिया गया पट्टा/आवंटन तत्काल निरस्त किया जाए। HESCO NGO के भवन को अवैध घोषित कर ध्वस्त किया जाए और भूमि को मूल “साल जंगल” स्वरूप में बहाल किया जाए। इस आवंटन में शामिल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

संवैधानिक संकट की चेतावनी

प्रतिवेदन में चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक जाएगा। इसे केवल भूमि विवाद नहीं, बल्कि संविधान, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और पर्यावरण संरक्षण की साख से जुड़ा मामला बताया गया है।आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट विकेश नेगी देहरादून में वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ कोर्ट की शरण लेंगे। एडवोकेट विकेश नेगी का कहना है कि देहरादून में वन भूमि और आरक्षित वन भूमि पर बड़ी संख्या में अतिक्रमण हो रहे हैं। इस कारण दून घाटी की आबो-हवा बिगड़ गयी है और प्रदूषण निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वन भूमि लीज पर दिये जाने का मामला उजागर होने के बाद अब वो अतिक्रमण मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WordPress Archive Aquassi – Aquascape Shop Elementor Template Kit Aquaterias - Bottled Drinking Water Delivery WordPress Theme Aquato – Drinking Water Delivery WordPress Theme Aquavist – Fish Aquarium & Aquascape Elementor Template Kit Aqum | Contemporary Magazine WordPress Theme Aracelia – Travel Agency Elementor Template Kit Aragon – Creative Multi-Purpose WordPress Theme Arai Interior & Furniture Elementor Template kit Arangi – Organic WooCommerce Theme Aravt – Creative MultiPurpose Theme